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हिन्‍दी टाईपिंग अभ्‍यास के लिये 366 शब्‍द

  कहावत है ‘ कौआ चल हंस की चाल ‚ अपनी चाल भूल गया ’ अर्थात हमें अपने लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए। भारत देश के रूप में महज 70 साल पुराना लोकतंत्र अपने जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर है ‚ हालांकि दूसरों से बेहतर लेकिन अपने प्रतिस्पधयों से बहुत पीछे है। ॥ हमने अपनी दूसरी पंचवर्षीय योजना में समाजवादी अर्थव्यवस्था के रूप में शुरुआत की और अब पूंजीवादी राज्य बनने की कगार पर हैं। खैर ‚ अनुकूलनशीलता अस्तित्व की कुंजी है और जीवित रहने के लिए हमें 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव के नेतृत्व में अपनी अर्थव्यवस्था को खोलना पड़ा। यह एक विकल्प नहीं था ; समय की जरूरत थी। हम वैश्वीकरण का आनंद लेने लगे। वे उत्पाद जो जनसमूह की पहुंच से बाहर थे ‚ वो अब नुक्कड़ के स्टोरों पर मिलने लगे। हर विचारधारा का जीवनकाल होता है। सोवियत संघ के उदाहरण से उपयुक्त क्या हो सकता है। एक बार दुनिया की शक्ति धुरी ‚ एक दीवार के साथ गिर गई। जब आप कुछ ऐसा करने की कोशिश करते हैं ‚ जो स्वाभाविक नहीं है ‚ तो यह अंततः टूट जाता है। हमारी अर्थव्यवस्था कृषि आधारित अर्थव्यवस्...