45 WPM Hindi Dictation II High Court, SSC, Steno II S.NO. 33 II BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)
दूसरी जाति या धर्म में दो बालिगों की शादी को लेकर सर्वोच्च अदालत ने जो फैसला सुनाया है , वह ऐतिहासिक है। यह फैसला इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि अब खाप पंचायतों की मनमानी पर लगाम लग सकेगी। एक खाप के ‘ फैसले ’ के खिलाफ दायर जनहित @ याचिका पर दिए चौवन पेज के फैसले में सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा कि दो बालिगों की मर्जी से की गई शादी में खाप पंचायत या किसी भी पक्ष का दखल गैरकानूनी है। इस मामले में न माता-पिता , न समाज और न ही कोई पंचायत @ दखल दे सकती है। अगर ऐसी शादी में कहीं कुछ गलत नजर आता है तो इसका फैसला करना कानून और अदालत का काम है , न कि किसी और का। प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ ने खाप पंचायतों को साफ-साफ चेताया है कि @ वे कानून हाथ में न लें और समाज की ठेकेदार न बनें। अदालत ने आन के नाम पर की जाने वाली हत्याओं (ऑनर किलिंग) को रोकने के लिए कानून बनाने की सिफारिश की है। जब तक कानून नहीं बन जाता तब तक अदालत के दिशा-निर्देश @ लागू रहेंगे , जिन्हें छह हफ्ते के भीतर लागू किया जाना है। अदालत ने सुधारात्मक उपाय और रोकथाम के कदम भी सुझाए हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि...