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Showing posts from May, 2018

High Court Dictation Online Final Test Series || Part-20|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)

दहेज मृत्‍यु के एक मामले में यह विचार करते हुये कि याची की पुत्री मुश्‍किल से 20 माह की है, याची की विवाहित बहन के द्वारा पुत्री की हर समय देखभाल किये जाने की आशा नहीं की जा सकती है, याची के माता-पिता वृद्ध तथा शिथिलांग है, बच्‍चे को इस सुकुमार आयु में पिता के स्‍नेह व देखभाल की आवश्‍यकता होगी, अभियुक्‍त को जमानत पर रिहा कर दिया गया। जहॉं साक्षियों के प्रकथनों ने प्रकट किया कि अभियुक्‍त पति ने दहेज के लिये मृतक पत्‍नी से झगडा किया, उसको पीटा भी, जमानत नामंजूर कर दी गयी। जहॉं दहेज की मांग के लिये कोई आधार नहीं था, अभियुक्‍त पति के द्वारा मानसिक क्रूरता तथा उत्‍पीडन कारित करने के किसी साक्ष्‍य का भी अभिकथन नहीं किया गया, अभियुक्‍त को जमानत पर छोड दिया गया। जहॉं सीएफएसएल की व्‍याख्‍या में प्रकथन था कि सुसाइड नोट मृतका की हस्‍तलिपि में नहीं था, जमानत दे दी गयी। जहॉं सास के विरुद्ध कोई प्रत्‍यक्ष या विशिष्‍ट अभिकथन नहीं था, अपराध भा.दं.सं. की धारा 304बी के अंतर्गत था, उसे जमानत दे दी गयी। जहॉं दहेज की मांग या उत्‍पीडन का कोई साक्ष्‍य नहीं था, आवेदक के 20 माह की पुत्री थी, अभियुक्‍त को जम...

High Court Dictation Online Test Series || Part-19|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)

सभापति महोदय, पिछले साल इस सदन में यह सुझाव रखा गया था कि हमारे किसान जो फसल पैदा करते हैं उसका बीमा करने की व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए। इस सुझाव पर विचार करने के लिये कुछ सदस्‍यों ने एक योजना भी बनायी थी लेकिन फसल बीमा योजना पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इस योजना को अभी तक लागू नहीं किया गया है। योजना आयोग ने यह आश्‍वासन दिया था कि वह इसके लिये आवश्‍यक धन की व्‍यवस्‍था करेगा। हो सकता है कि इस संबंध में राज्‍य सरकारों में एक मत न रहा हो। उनकी यह धारणा हो सकती है कि इस योजना के लागू होने से किसानों पर बोझा पडेगा। यद्यपि अभी भी राज्‍य सरकारों के इस दृष्टिकोण में कोई विशेष परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है फिर भी इतना अवश्‍य है कि अब वे फसल बीमा की योजना को लागू करने के लिये तैयार हैं। इसके लिये वे चाहते हैं कि इस योजना पर आने वाले खर्च केंद्र सरकार वहन करे।      यह वाद ग्राम केशवगढ तहसील व जिला डिंडौरी स्थित सर्वे क्रमांक 12/2 रकवा 150 हेक्‍टेयर के स्‍वत्‍व घोषणा एवं स्‍थायी निषेधाज्ञा प्राप्‍त के अनुतोषों के लिये प्रस्‍तुत किया गया है। वादी का वाद संक्षेप मे...

High Court Dictation Online Test Series || Part-18|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)

इस आवेदन द्वारा आवेदक की ओर से प्रस्‍तुत आवेदन पत्र अंतर्गत धारा 5 परिसीमा अधिनियम वास्‍ते विलंब माफी का निराकरण होगा। आवेदन के तथ्‍य यह हैं कि प्रार्थी कृषक होकर अल्‍प शिक्षित वर्ग से संबंधित है। प्रार्थी को अ‍धीनस्‍थ न्‍यायालय द्वारा पारित अवार्ड की जानकारी होने पर अपने अधिवक्‍ता से संपर्क किया। अधिवक्‍ता द्वारा बताया गया कि आदेश की अपील करनी होगी, इस हेतु 6 माह का समय अपील हेतु प्राप्‍त है। अपने अधिवक्‍ता द्वारा दी गयी जानकारी के कारण तीन माह की समयावधि में रिफरेंस प्रस्‍तुत नहीं कर सका। विगत दिनांक 22 मई 2016 को प्रार्थी ने कुमारी अंजली गुप्‍ता अभिभाषक से संपर्क किया। उनके द्वारा बताया गया कि रिफरेंस प्रस्‍तुत करने हेतु तीन माह की समयावधि है। प्रार्थी को रिफरेंस प्रस्‍तुत करने में हुआ तीन माह का विलंब पूर्व के अभिभाषक द्वारा दी गयी मिथ्‍या जानकारी के आधार पर होने से न्‍यायहित में क्षमा किये जाने योग्‍य है। आवेदन स्‍वीकार कर रिफरेंस प्रस्‍तुत करने में हुआ विलंब सदभाविक एवं पूर्व अभिभाषक द्वारा दी गयी गलत जानकारी पर आधारित होने से न्‍यायहित में क्षमा कर रिफरेंस को सुनवाई बाबत ग्रह...

High Court Dictation Online Test Series || Part-15|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)

  दण्‍ड प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के प्रावधान अनुसार किसी भी व्‍यक्ति पर जो कि लोकसेवक है और जिसे सरकार या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकता है, किसी ऐसे अपराध का अभियोग है, जिसके बारे में यह अभिकथित है कि वह उसके द्वारा तब किसी गया था, जब वह उसके पदीय कर्तव्‍य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे कार्य करना तात्‍पर्यित था, जब कोई भी न्‍यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान राज्‍य सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्‍यथा नहीं।      य‍द्यपि विभिन्‍न न्‍याय दृष्‍टांतों में प्रतिपादित मतानुसार यह भी स्‍पष्‍ट है कि ऐसी मंजूरी तब आवश्‍यक नहीं है, जब अभियोजित कार्य ऑफिशियल ड्यूटी की कैपीसिटी में नहीं किया गया हो। किंतु विचारण न्‍यायालय के परिवाद प्रकरण के अवलोकन पर यह प्रकट है कि विचारण न्‍यायालय द्वारा उक्‍त परिवाद प्रकरण के संबंध में पुलिस थाना शाजापुर से बुलाये गये जांच प्रतिवेदन में यह प्रतिवेदित किया गया है कि घटना दिनांक को ही परिवादी सुशीलाबाई, उसके पुत्र मनोज एवं अन्‍य तीन व्‍यक्तियों द्वारा गैर-परि‍वादीगण के साथ गाली-गलौज की गयी और गैर-परिवा...

High Court Dictation Online Test Series || Part-14|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP

अभियुक्‍त नररू पर भारतीय दण्‍ड प्रक्रिया की धारा 363 एवं 366 के तहत यह आरोप है कि उसने दिनांक 25.5.15 को 10.30 बजे फरियादी का मकान ग्राम गढ़ाकोटा हवेली से अभियोक्‍त्री उम्र लगभग 18 वर्ष अप्राप्‍तवय को उसके विधिपूर्ण संरक्षक मैथलीशरण की विधि संरक्षकता में उसे उसकी सम्‍मति के बिना, उससे शादी करने के लिए बहला-फुसला कर भाण्‍डेर, ग्‍वालियर, ले जाकर, उसका व्‍यपहरण करते हुए उसका सम्‍मति के बिना, अयुक्‍त संभोग करने अथवा शादी करने के लिए उसे विवश या विलुब्‍ध करने के आशय से या उसे शादी करने या अयुक्‍त संभोग करने के लिए विवश या विलुब्‍ध किया जायेगा, यह संभाव्‍य जानते हुए, ले जाकर व्‍यवहरण या अपहरण किया गया।      प्रकरण में कोई भी महत्‍वपूर्ण स्‍वीकृत तथ्‍य नहीं है। माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा विभिन्‍न न्‍याय दृष्‍टांतों में दिये गये दिशा-निर्देशों के प्रकाश में प्रकरण में अभियोक्‍त्री के नाम का उल्‍लेख नहीं किया जा रहा है।      संक्षेप में अभियोजन कहानी इस प्रकार है कि फरियादी मैथिलीशरण ने दिनांक 28.5.15 को पुलिस थाना टीकमगढ़ में इस आशय की प्रथम स...

40 WPM Hindi Dictation || High Court, SSC, Steno || S.NO.108|| BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)

यह अध्‍याय मजिस्‍ट्रेट के समक्ष कार्यवाही प्रारंभ होने से संबंधित है। जहां अभियुक्‍त को मजिस्‍ट्रेट के समक्ष हारिज होने के लिये समन किया गया, इस अध्‍याय के अंतर्गत कार्यवाही आरंभ हो जाती है और उसके बाद मजिस्‍ट्रेट धारा 203 के अंतर्गत परिवाद को खारिज नहीं कर सकता। आदेशिका जारी होने के समय न्‍यायालय यह उपपादित करने के लिये अपेक्षित है कि क्‍या प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है। उसे साक्ष्‍य की पर्याप्‍तता या अभियुक्‍त के दोषी होने की संभाव्‍यता का अवधारण करने की न तो आवश्‍यकता होती है और न ही करना चाहिए। इस बारे में विनिश्‍चय पर आने के लिये की क्‍या आदेशिका जारी होनी चाहिए, मजिस्‍ट्रेट को परिवाद को देखने से प्रकट होने वाली अंतर्निहित असंभाव्‍यताओं पर या अभिकथनों के समर्थन में परिवादी द्वारा लाये गये साक्ष्‍य पर विचार करना होता है। सेशन विचारणीय मामले में मजिस्‍ट्रेट द्वारा साक्ष्‍य की गहन परीक्षा अनुज्ञेय नहीं है। मजिस्‍ट्रेट यह जांच प्रारंभ नहीं कर सकता कि क्‍या गुणागुण पर प्रथम दृष्‍टया मामला सिद्ध हुआ है।       समन के स्‍थान पर वाण्‍रट जारी करने के लिये प्रकरणो...

High Court Dictation Online Test Series || Part-11|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)

मरणान्‍वेषण सूचना के दौरान अभिलिखित प्रकथन- इस धारा के तहत लिपिबद्ध तथा मरणान्‍वेषण सूचना के साथ बंद एक पूर्ववर्ती प्रकथन, उसे करने वाले का प्रतिवादी करने या अभियोजन द्वारा उसकी व्‍याख्‍या करने के अतिरिक्‍त अभियुक्‍तों के नाम प्रकट करने सहित किसी प्रयोजन हेतु अभियोजन द्वारा प्रयुक्‍त नहीं किया जा सकता है।      मरणान्‍वेषण सूचना के दौरान अभिलिखित प्रकथन- मरणान्‍वेषण के दौरान अन्‍वेषकों द्वारा लेखबद्ध साक्षियों का कथन धारा 162 के अवरोध के भीतर होगा और यह केवल परावचन के लिये प्रयुक्‍त हो सकता है लेकिन धारा 162 के तहत दी गयी मरणान्‍वेषण रिपोर्ट में लेखबद्ध कथनों में कोई परावचन चिन्‍हांकित नहीं थे। यह अभिनिर्धारित हुआ था कि साक्ष्‍य में उक्‍त कथन ग्राह्य नहीं थे। जहाँ प्रथम एफ.आई.आर. के मिथ्‍या पाये जाने पर दूसरी एफ.आई.आर. दाखिल की गयी थी, और परिवादी तथा क्षत साक्षियों को शामिल करते हुये सभी प्रत्‍यक्ष साक्षियों ने दूसरी एफ.आई.आर. के सविवरण को समर्थित किया था वहां यह माना गया था कि यह धारा 162 द्वारा प्रभावित नहीं होगा।      अन्‍वेषण के दौरान पु...

40 WPM Hindi Dictation || High Court, SSC, Steno || S.NO.108|| BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)

यह अध्‍याय मजिस्‍ट्रेट के समक्ष कार्यवाही प्रारंभ होने से संबंधित है। जहां अभियुक्‍त को मजिस्‍ट्रेट के समक्ष हारिज होने के लिये समन किया गया, इस अध्‍याय के अंतर्गत कार्यवाही आरंभ हो जाती है और उसके बाद मजिस्‍ट्रेट धारा 203 के अंतर्गत परिवाद को खारिज नहीं कर सकता। आदेशिका जारी होने के समय न्‍यायालय यह उपपादित करने के लिये अपेक्षित है कि क्‍या प्रथम दृष्‍टया मामला बनता है। उसे साक्ष्‍य की पर्याप्‍तता या अभियुक्‍त के दोषी होने की संभाव्‍यता का अवधारण करने की न तो आवश्‍यकता होती है और न ही करना चाहिए। इस बारे में विनिश्‍चय पर आने के लिये की क्‍या आदेशिका जारी होनी चाहिए, मजिस्‍ट्रेट को परिवाद को देखने से प्रकट होने वाली अंतर्निहित असंभाव्‍यताओं पर या अभिकथनों के समर्थन में परिवादी द्वारा लाये गये साक्ष्‍य पर विचार करना होता है। सेशन विचारणीय मामले में मजिस्‍ट्रेट द्वारा साक्ष्‍य की गहन परीक्षा अनुज्ञेय नहीं है। मजिस्‍ट्रेट यह जांच प्रारंभ नहीं कर सकता कि क्‍या गुणागुण पर प्रथम दृष्‍टया मामला सिद्ध हुआ है।       समन के स्‍थान पर वाण्‍रट जारी करने के लिये प्रकरणो...

High Court Dictation Online Test Series || Part-6 || BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)

अशोकनगर जिले के बामौरकलां थानान्‍तर्गत ग्राम एरावनी में दिन दहाड़े प्रात: 10:00 बजे दिनांक 20 जनवरी 2005 को एक दबंग ने एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक सहायिका की सरेआम कुल्‍हाड़ी से काट कर हत्‍या कर दी। इस दोहरे हत्‍याकाण्‍ड को तब अंजाम दिया /गया ये दोनों महिलाकर्मी अपने गांव समर्रा से दो किमी दूर स्थित एरावनी आंगनबाड़ी केन्‍द्र के बच्‍चों को मध्‍यान्‍ह भोजन लेकर जा रही थीं। हत्‍या की यह वारदात घात लगा कर तालाब की पार पर रास्‍ते में अंजाम /दी गई। हत्‍या की यह वारदात लेने-देन को लेकर हुए विवाद की परणिति बताई जा रही है।       एसडीओपी एसएस अग्रवाल ने बताया कि महिला कस्‍तूरी देवी पत्नि बृजकिशोर उम्र 35 साल निवासी समर्रा आंगनबाड़ी केन्‍द्र एरावनी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के/ पद पर कार्यरत थी जबकि उसकी साथी एक अन्‍य महिला श्रीमती राजो यादव सीताराम यादव उम्र 40 वर्ष इसी केन्‍द्र पर आंगनबाड़ी सहायिका के पद पर कार्यरत थी। कस्‍तूरी के पति बृजकिशोर ने पुलिस को बताया कि आज प्रात: /एरावनी आंगनबाड़ी केन्‍द्र के बच्‍चों को ये दोनों महिलाकर्मी दलिया खिचड़ी मध्‍यान्‍ह भोज...