High Court Dictation Online Final Test Series || Part-20|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)
दहेज मृत्यु के एक मामले में यह विचार करते हुये कि याची की पुत्री मुश्किल से 20 माह की है, याची की विवाहित बहन के द्वारा पुत्री की हर समय देखभाल किये जाने की आशा नहीं की जा सकती है, याची के माता-पिता वृद्ध तथा शिथिलांग है, बच्चे को इस सुकुमार आयु में पिता के स्नेह व देखभाल की आवश्यकता होगी, अभियुक्त को जमानत पर रिहा कर दिया गया। जहॉं साक्षियों के प्रकथनों ने प्रकट किया कि अभियुक्त पति ने दहेज के लिये मृतक पत्नी से झगडा किया, उसको पीटा भी, जमानत नामंजूर कर दी गयी। जहॉं दहेज की मांग के लिये कोई आधार नहीं था, अभियुक्त पति के द्वारा मानसिक क्रूरता तथा उत्पीडन कारित करने के किसी साक्ष्य का भी अभिकथन नहीं किया गया, अभियुक्त को जमानत पर छोड दिया गया। जहॉं सीएफएसएल की व्याख्या में प्रकथन था कि सुसाइड नोट मृतका की हस्तलिपि में नहीं था, जमानत दे दी गयी। जहॉं सास के विरुद्ध कोई प्रत्यक्ष या विशिष्ट अभिकथन नहीं था, अपराध भा.दं.सं. की धारा 304बी के अंतर्गत था, उसे जमानत दे दी गयी। जहॉं दहेज की मांग या उत्पीडन का कोई साक्ष्य नहीं था, आवेदक के 20 माह की पुत्री थी, अभियुक्त को जम...