40-45 WPM Hindi Dictation II High Court, SSC, Steno II S.NO. 54 II BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)

      आजकल के अख़बार किसानों की पीड़ा की चर्चा से भरे हैं। इन खबरों के पीछे देश के कृषि क्षेत्र की व्यापक कमजोरी साफ़ दिखाई देती है। यूपीए सरकार के दस वर्षों में कृषि जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि 3.7 फीसदी सालाना थी। मोदी सरकार के पहले चार वर्षों में यह गति धीमी होकर 2.4 फीसदी पर आ गई है। इस मंदी का कारण कुछ हद तक 2014 और 2015 का सूखा था। लेकिन इसमें आर्थिक नीतियों का भी हाथ रहा है। इन चार सालों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बहुत कम वृद्धि हुई। और नवंबर 2016 की नोटबंदी ने भी कृषि बाजार में बहुत उथल-पुथल मचाई, जिसके कारण कई किसानों को अपनी उपज की पूरी कीमत नहीं मिली।
     किसानों की आम शिकायत है कि उन्हें अपने उत्पादन के लिए वाजिब कीमतें नहीं मिलतीं, लेकिन मसला केवल कीमतों का नहीं है। न ही कर्जमाफी का। सच तो यह है की हमारे देश में जमीन की उत्पादकता बहुत कम है और बहुत से किसान छोटे रकबे में खेती कर रहे हैं। हमारी कृषि की उत्पादकता (प्रति हेक्टेयर) चीन या अन्य एशियाई देशों की तुलना में बहुत कम है। हमारे किसान न तो श्रेष्ठ टेक्नोलॉजी इस्तेमाल कर रहे हैं और न ही पानी का दक्षतापूर्वक उपयोग। पानी खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधन है। अपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के काम को शीर्ष प्राथमिकता देनी चाहिए। परंतु इनसे जुड़ीं नहरों का जाल ऐसा हो कि पानी बड़ी संख्या में किसानों तक पहुंचे। सिंचाई की स्थिति वर्तमान में ऐसी है कि नहर के प्रारंभिक भाग में किसान पानी का अनुचित लाभ उठा रहे हैं और दूसरे छोर के किसानों को पानी ही नहीं मिलता।
     पानी के समुचित प्रयोग की दिशा में सुधार आवश्यक है। चूंकि राजनैतिक ‘मजबूरियों’ के कारण सरकार पानी की कीमत वसूल करने से झिझकती है, आय की कमी और सिंचाई खर्च के दुरुपयोग के कारण नहरों के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। साथ ही भूमिगत जल के प्रयोग पर कोई रोकटोक नहीं है। किसान जितना पानी चाहे, अपने बोरवेल से पम्प के ज़रिये निकाल सकता है, क्योंकि बिजली मुफ्त है। नतीजा यह है कि पंजाब व अन्य राज्यों में भू-जल स्तर गंभीर गति से नीचे जा रहा है। जलवायु परिवर्तन से हालात और भी बिगड़ेंगे।
    बीजों की गुणवत्ता भी कृषि के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों ने उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने में विशेष योगदान नहीं दिया है। राज्य सरकारों की ओर से इन विश्वविद्यालयों को न केवल धनराशि बल्कि स्वायत्तता भी दी जानी चाहिए,

Comments

Popular posts from this blog

𝐌𝐏 𝐇𝐢𝐠𝐡 𝐂𝐨𝐮𝐫𝐭 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐢 𝐃𝐢𝐜𝐭𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 𝟒𝟎𝐖𝐏𝐌 𝐒.𝐍.𝟏𝟳|| #HindiDictation #mphc #40WPM

हिन्‍दी टाईपिंग अभ्‍यास के लिये 366 शब्‍द

Important general knowledge facts