42-44 WPM Hindi Dictation ॥ High Court, SSC, Steno ॥ S.NO.76 ॥ BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)


     अभियुक्‍त रामस्‍वरूप के विरुद्ध भा.दं.वि. की धारा 341 के अपराध का आरोप है कि दिनांक 25.09.14 की रात्रि करीब 8:00 बजे ग्राम मोहनगढ़ में पंकज यादव के कुआं के पास उसने फरियादी मनोज चौरसिया को उस दिशा में जिसमें उसे जाने का अधिकार था जाने से स्‍वेच्‍छया निवारित कर उसका सदोष अवरोध कारित किया।
     इसी अभियुक्‍त के विरुद्ध भा.दं.वि. की धारा 307 के अपराध का यह आरोप है कि उसी समय, स्‍थान एवं दिनांक को उसने मनोज चौरसिया को धारदार शस्‍त्र कुल्‍हाड़ी से गर्दन, सिर एवं बाएं हाथ के कौंचा में मारकर उपहति इस आशय या ज्ञान से तथा ऐसी परिस्थितियों में उपहति कारित की, कि यदि उसके उक्‍त कृत्‍य के कारण मनोज चौरसिया की मृत्‍यु हो जाती तो वह हत्‍या का दोषी होता।
     इसी अभियुक्‍त के विरुद्ध भा.दं.वि. की धारा 506 भाग 2 के अपराध का यह आरोप भी है कि उसी समय, स्‍थान एवं दिनांक को उसने फरियादी मनोज चौरसिया को जान से मारने की धमकी देकर आपराधिक अभित्रास कारित किया।
    अभियोजन घटना का संक्षिप्‍त सार यह है कि फरियादी आहत मनोज चौरसिया दिनांक 25.09.15 की रात्रि पंकज यादव के कुआँ पर ट्रेक्‍टर लेकर फसल की थ्रेसिंग करने गया था। थ्रेसिंग के बाद ट्रेक्‍टर ट्रॉली में कच्‍ची तिली भरकर वापस आते समय कुआँ के पास आम रास्‍ता में रात्रि में करीब 9:00 बजे रामस्‍वरूप मिला और ट्रेक्‍टर रोककर उसने, उसे जान से मारने की नियत से कुल्‍हाड़ी मारी जो उसे गर्दन में, दूसरी कुल्‍हाड़ी सिर में एवं तीसरी कुल्‍हाड़ी उसे बाएं हाथ के कौंचा में लगी खून निकलने लगा। वह चिल्‍लाया तो राजेन्‍द्र कुशवाहा, धनीराम कुशवाहा, जो वहीं थ्रेसिंग पर मजदूरी करने आए थे, आवाज सुनकर आ गए। उन्‍होंने घटना देखी व बचाने दौड़े इतने में रामस्‍वरूप कुल्‍हाड़ी लेकर भाग गया। जाते-जाते कह रहा था कि आज तो बच गया दोबारा यहाँ आएगा तो जान से खत्‍म कर देंगे। परिवादी की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षी केन्‍द्र सिमरा में अपराध क्रमांक 66/17 अंतर्गत धारा 341, 307, 506बी भा.दं.वि. पंजीबद्ध कर मामला विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान घटनास्‍थल का नक्‍शा मौका बनाया गया। साक्षियों के कथन लिए गए आहत का चिकित्‍सा परीक्षण कराया गया। अभियुक्‍त को गिरफ्तार किया गया तथा मामले की विवेचना पूर्ण उपरांत अभियोग पत्र दिनांक 30.11.15 को न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट प्रथम श्रेणी, जिला टीकमगढ़ के न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया। जहाँ से दिनांक 05.12.14 को मामला सत्र सुपुर्द किया गया। दिनांक 04.12.11 को मामला सत्र न्‍यायाधीश महोदय टीकमगढ़ के समक्ष प्रस्‍तुत हुआ। जहाँ से विधिवत विचारण हेतु प्रकरण इस न्‍यायालय को अंतरण पर प्राप्‍त हुआ। विधिवत विचारण किया गया।

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