42-45 WPM Hindi Dictation ॥ High Court, SSC, Steno ॥ S.NO.69 ॥ BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)
संसार
पहले ही रोबोट से त्रस्त था। रोबोट द्वारा अधिकाधिक कार्य जैसे
असेंबली लाइन पर कारों का निर्माण किया ही जा रहा था। अब कंप्यूटर द्वारा
बौद्धिक कार्यों को भी किया जाने लगा है। इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई
कहते हैं। जैसे यदि आपको कोर्ट में कोई मामला दायर करना हो तो आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस प्रोग्राम से आप जान सकते हैं कि उसी संबंध में कौन से पूर्व
निर्णय दिए गए हैं। पूर्व में यह काम वकीलों द्वारा किया जाता था। अब एक
सॉफ्टवेयर द्वारा किया जा सकता है। रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का
सीधा प्रभाव है कि श्रमिक की जरूरत कम होगी और रोजगार घटेंगे, लेकिन दूसरी ओर इन तकनीकों से रोजगार के
नए अवसर भी बनेंगे।
जैसे कंप्यूटर के माध्यम से ई-कॉमर्स को बढ़ावा मिला है। छोटे
किराना दुकानदार भी
इंटरनेट के जरिए ग्राहकों से ऑर्डर लेकर उनके घर पर माल पहुंचा रहे हैं। उनका कारोबार बढ़ा है।
इसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से विधिक शोध करने से ज्यादा संख्या में
मामले दायर किए जा सकेंगे, जिन्हें निपटाने के लिए
ज्यादा वकीलों की जरूरत पड़ेगी। तमाम रोगों की पहचान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा की जा
सकती है जिससे उपचार सही होगा, मनुष्य की आयु बढ़ेगी और उसके
द्वारा बाजार से अधिक माल की खपत की जाएगी। दूसरे कुछ कार्य हैं, जिन्हें कंप्यूटर, रोबोट या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा किया जाना लगभग असंभव
है। जैसे बीमार का उपचार करने हेतु नर्स, छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए नर्सरी टीचर और बगीचे को
संभालने के लिए माली। इस प्रकार के कार्यों में रोजगार के विस्तार की
पूरी संभावना है, क्योंकि
रोबोट और आर्टिफिशियल
इंटेलिजेंस से कुल आय बढ़ेगी व बाजार में इन सेवाओं की मांग बढ़ेगी।
ध्यान
दें कि आय बढ़ने के बाद भी रोटी तो पूर्ववत उतनी ही खाई जाती है, लेकिन ब्यूटीशियन, नर्सरी टीचर, गेम्स टीचर आदि सेवाओं की खपत ज्यादा बढ़ी है। इस
प्रकार रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दो विपरीत प्रभाव हमारे
सामने आते हैं। एक ओर सीधे रोजगार का हनन तो दूसरी ओर नए क्षेत्रों में
रोजगार में वृद्धि। जानकारों के बीच सहमति नहीं है कि इन दोनों में से कौन
सा प्रभाव ज्यादा कारगर होगा। एक अध्ययन के अनुसार 48 प्रतिशत जानकार मानते हैं कि रोजगार पर
नकारात्मक प्रभाव
पड़ेगा जबकि 52 प्रतिशत
मानते हैं कि रोजगार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस अनिश्चितता के बीच ही हमें
रास्ता बनाना है। हम रोबोट तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रोजगार के
हनन को रोक नहीं सकेंगे। हम यह कर सकते हैं कि जिन क्षेत्रों में नए
रोजगार बनने की संभावना है, उन्हें
बढ़ावा दें
जिससे जितने रोजगार घटें, उससे
ज्यादा रोजगार हम पैदा कर सकें।
एक
अध्ययन के अनुसार चीन में 65 प्रतिशत लोग नई तकनीक आने से
आशान्वित हैं। उन्हें भरोसा है कि आखिरकार उनके रोजगार बढ़ेंगे, लेकिन विश्व स्तर पर केवल 29 प्रतिशत लोग ही ऐसी आशा रखते हैं।
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