42 WPM Hindi Dictation II High Court, SSC, Steno II S.NO. 42 II BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)


यह अपील धारा-374 दंप्रसं 1973 के अंतर्गत श्री अंशुल खरे न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी प्रथम श्रेणी टीकमगढ़ द्वारा आप‍राधिक प्रकरण क्रमांक 862/2010 राज्‍य विरुद्ध सुजान तथा एक अन्‍य पारित निर्णय एवं दंडादेश दिनांक 30.04.2011 के विरुद्ध की गयी है जिसके द्वारा अभियुक्‍त/अपीलार्थी को भा.दं.सं.@ 1860 की धारा 323/34 (तीन वर्ष) के अतंर्गत तीन-तीन महा के कठोर कारावास एवं तीन-तीन सौ रुपए के अर्थदण्‍ड, धारा 427 भा.दं.सं. 1860 में तीन माह के सश्रम कारावास एवं तीन सौ रुपये के अर्थदण्‍ड तथा भा.दं.सं. 1860 की धारा 336 के @अंतर्गत दो सौ पाचास रुपये के अर्थदण्‍ड से दण्डित किया गया है, अर्थदण्‍ड की राशि अदा न करने की दशा में प्रत्‍येक अपराध के लिए पन्‍द्रह-पन्‍द्रह दिवस का कठोर कारावास पृथक से भुगताये जाने का आदेश दिया गया है।
प्रकरण में स्‍वीकृत @तथ्‍य यह है कि अभियुक्‍त/अपीलार्थी को धारा 323/34  एवं 427 भा.दं.सं. 1860 के आरोप से दोषमुक्‍त किया गया है। अभियुक्‍त/अपीलार्थी मनोहर की मृत्‍यु हो चुकी है।
    अब अपील की सुनवाई महज धारा 336 भा.दं.स. 1860 दोषसिद्धी के संबंध में की जा@ रही है।
    अभियोजन पक्ष यह है कि दिनांक 22.01.2009 को रात 8 बजे ग्राम मस्‍तापुर में फरियादी रामसिंह जो कि जिला पंचायत सदस्‍य के चुनाव का प्रत्‍याशी था अपनी जीप क्रमांक एम.पी.36 एमएम 0271 में ग्राम मस्‍तापुर आया था और जनपद@ सदस्‍य के प्रत्‍याशी सत्‍यम सोनी निवासी मोंगना की जीप मार्शल क्रमांक एम.पी.38 सी 4856 मसतापुर से वापस जा रही थी। स्‍कूल के सामने खड़े लोगों ने यकायक विवाद करने की योजना बनाई और अभियुक्‍त मनोहर सिंह, राजेश, पंकज, विवेक, भानू, शिवा, अमन@ तथा 25-30 अन्‍य आदमी आये और माँ-बहन की गालियां देकर प्रत्‍याशी ऋषि यादव की मारपीट करने के लिए दौड़े वहां खड़ी जीप बोलेरो और मार्शल में अभियुक्‍तगण एवं अन्‍य 25-30 आदमियों ने पत्‍थर मारे जिससे फरियादी को पीठ में पत्‍थर से चोट @आई, मार्शल जीप के चालक पप्‍पन यादव पीठ में पत्‍थर से चोट लगी, जीप में पत्‍थर लगने से पीछे एवं साइड का शीशा टूट गया और फरियादी एवं पप्‍पन मार्शल जीप छोड़कर भाग गए। पत्‍थर लगने से कोमल को पैर,@ सीना में मुंदी चोटें आई। फरियादी रामसिंह की रिपोर्ट पर थाना मोहनगढ़ में अपराध क्रमांक 14/10 कायम किया जाकर प्रकरण विवेचना में लिया गया।
    विचारण न्‍यायालय के समक्ष अभियुक्‍त/अपीलार्थी ने आरोप स्‍वीकार नहीं किया, विचारण की माँग की। अभियुक्‍त परीक्षण के दौरान@ उनका कहना है कि वे निर्दोष हैं, उन्‍हें रंजिश के कारण झूठा फसाया गया है। अपीलार्थी का यह पक्ष है कि प्रश्‍नगत निर्णय एवं दण्‍डादेश विधि एवं तथ्‍यों के सर्वथा प्रतिकूल है। अपीलार्थी प्रथम अपराधी है, उन्‍हें परिवीक्षा का लाभ दिया जाना@ उचित है।

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