43 WPM Hindi Dictation II High Court, SSC, Steno II S.NO. 62 II BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को प्रशासनिक विवाद और
राजनीतिक संकट की मानो आदत सी हो गई है। इनका नाता प्रदेश के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
और केंद्र सरकार से है। मुख्यमंत्री के मन में संस्थानों के प्रति नाम मात्र
का ही सम्मान है जबकि केंद्र सरकार @प्रशासनिक मशीनरी पर
से नियंत्रण छोडऩा नहीं चाहती। केंद्र ने केजरीवाल का काम कठिन बनाने में कोई कसर
उठा नहीं रखी है। परंतु ताजा विवाद अतीत से एकदम अलग है। दिल्ली के मुख्य
सचिव ने एक गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री @के आवास के भीतर आम आदमी पार्टी के विधायकों ने उन पर हमला किया।
दिल्ली के शीर्ष नौकरशाह ने पुलिस में शिकायत की और पुलिस ने मुख्यमंत्री के आवास पर छापा
मारा। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच
की जाएगी। नौकरशाही संगठनों@ की नाराजगी जाहिर है। वहीं दिल्ली सरकार के
समर्थकों और आप का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से तैनात नौकरशाह
केजरीवाल प्रशासन के खिलाफ राजनीति प्रेरित अभियान चला रहे हैं। दरअसल
दिल्ली सरकार को यह अधिकार ही नहीं है कि वह अहम पदों@ पर अपनी पसंद के नौकरशाह नियुक्त कर सके।
पुलिस
को हमले के इस आरोप की पारदर्शी तरीके से जांच करनी चाहिए। उसके बाद
अदालत तय करेगी कि मामला दरअसल क्या था। बहरहाल, केजरीवाल भी पूरे प्रकरण से पल्ला नहीं
झाड़ सकते क्योंकि उन पर आरोप@ है कि उन्होंने एक
तरह से नौकरशाह पर किए गए हमले को स्वीकार ही किया। ऐसी शासन शैली को माफ नहीं किया
जा सकता है जिसमें नौकरशाहों पर शारीरिक हमला किया जाता हो। बतौर
राजनेता केजरीवाल ऐसे मामलों में उचित कदम उठाने में विफल रहे@ हैं और उन्हें इसकी जवाबदेही ही नहीं उठानी चाहिए बल्कि कीमत भी चुकानी
चाहिए।यहां बड़े ढांचागत प्रश्न भी हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। दिल्लीवासियों को
केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच की लड़ाई की कीमत चुकानी पड़ रही है।
इसका असर@ दरअसल शासन और जवाबदेही पर पड़ रहा है। यह बात
एकदम स्पष्ट है कि दिल्ली को सीमित राज्य का दर्जा देने का प्रयोग बुरी तरह नाकाम हो रहा है। एक
स्तर पर देखा जाए तो इसके लिए केजरीवाल को दोषी ठहराना बेमानी है। देश
में@ यह चलन रहा है और हर मुख्यमंत्री चाहता है
कि वह अपनी पसंद के नौकरशाह नियुक्त करे। कुछ ही ऐसे होंगे जो अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी
द्वारा नियुक्त नौकरशाहों के साथ निबाह करें।
ढांचागत कमी की बात करें तो उसका संबंध मौजूदा राजनीतिक झगड़े से परे@ है। दरअसल जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री की जवाबदेही और उसके अधिकारों के बीच बड़ा अंतर है।
ढांचागत कमी की बात करें तो उसका संबंध मौजूदा राजनीतिक झगड़े से परे@ है। दरअसल जनता के चुने हुए मुख्यमंत्री की जवाबदेही और उसके अधिकारों के बीच बड़ा अंतर है।
इस
स्थिति को बदलना होगा। दिल्ली में पुलिस और नौकरशाही का नियंत्रण निश्चित
तौर पर चुनी हुई सरकार के हाथ होना चाहिए। नगर निकाय भी जवाबदेही को बांटने@ और सत्ता के ढांचे को जटिल बनाने का ही काम करता है।
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