45-48 WPM Hindi Dictation ॥ High Court, SSC, Steno ॥ S.NO.77 ॥ BUDDHA ACADEMY TIKGAMRH (MP)
मामले के अनुसंधान अधिकारी रघुवीर सोनी ने अपने प्रतिपरीक्षण की
कण्डिका 11 में यह स्वीकार किया है कि उसने अनुसंधान में ऐसा नहीं पाया था कि
रामकुमार शर्मा ने चैक बुक में कोई फेरबदल या असत्य प्रविष्टि की है। इस साक्षी
का ऐसा कथन है कि रामकुमार शर्मा ने चैक बुक में कोई फेरबदल या प्रविष्टि नहीं की
थी। इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण की कण्डिका 16 में यह स्वीकार किया है कि उसके
सामने किसी हितग्राही ने कोई शिकायत नहीं की थी।
इस साक्षी ने प्रतिपरीक्षण
की कण्डिका 18 में इस साक्षी ने यह स्वीकार किया है कि उसने यह नहीं पाया कि किसी
शासकीय राशि का आरोपी के द्वारा नुकसान किया गया है। इस साक्षी ने यह स्वीकार
किया है कि उसने अनुसंधान के दौरान यह नहीं पाया कि आरोपी ने कोई फर्जी दस्तावेज
तैयार किए थे। प्रतिपरीक्षण की कण्डिका 11 में इस साक्षी ने यह कथन किया है कि
उसने पूरे प्रकरण में यह नहीं पाया कि रामकुमार शर्मा ने कोई राशि स्वयं के उपयोग
में लाई हो या अपने खाते में जमा कराई हो। इस साक्षी ने यह भी स्वीकार किया है कि
राहत राशि का उपयोग रामकुमार शर्मा ने अन्य प्रयोजन में नहीं किया।
इस प्रकार उपरोक्त
साक्षियों ने प्रतिपरीक्षण के दौरान जो कथन किए हैं उनमें ऐसा कथन नहीं आया कि
अभियुक्त ने ओलावृष्टि राहत राशि के वितरण में कोई छल किया और 3 चैक बुकें अपने
पास छल करने के आशय से रखीं और इसी शासकीय राशि को ओलावृष्टि राहत राशि में वितरण
करने के अलावा उसका कोई अन्य प्रयोग किया और कपट करने के आशय से चैक बुकों को
विकृत या मिथ्याकृत किया।
प्रतिरक्षा में अभियुक्त
रामकुमार शर्मा ने कथन किया है कि इस मामले में जो आरोप उस पर विरचित किए गए हैं
उन्हीं के संबंध में उच्च स्तरीय विभागीय जाँच अपर कलेक्टर टीकमगढ़ द्वारा की
गई थी। उन्होंने अपना जाँच प्रतिवेदन दिनांक 19.11.12 को प्रस्तुत किया था जिसकी
सत्य प्रति प्रदर्श डी-4 है, जो उसने लोक सूचना के अधिकार में प्राप्त की थी।
विभागीय जाँच प्रतिवेदन में अपर कलेक्टर टीकमगढ़ द्वारा उस पर लगे आरोपों को
पूर्णत: बेबुनियाद व मनगढ़ंत पाया है उन्होंने राहत राशि के प्रकरण में उदासीनता
का दोषी पाया था, परंतु अनुशासनात्मक प्राधिकारी कमिश्नर सागर ने आदेश दिनांक
12.05.2014 द्वारा विभागीय जाँच अधिकारी के उक्त निष्कर्ष को भी निरस्त कर दिया
था जिसकी सत्य प्रति प्रदर्श डी-5 है उसमें स्वीकृत राहत राशि से अधिक राहत राशि
वितरित नहीं की थी। इस संबंध में शाखा प्रबंधक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक
मर्यादित टीकमगढ़ द्वारा कलेक्टर टीकमगढ़ को जानकारी दी थी जो प्रदर्श डी-6 है
जिससे भी यह स्पष्ट हो जाता है कि आवंटित राशि से कम राशि का ही वितरण किया गया
है।
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