High Court Dictation Online Test Series || Part-11|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)
मरणान्वेषण सूचना के दौरान अभिलिखित प्रकथन- इस
धारा के तहत लिपिबद्ध तथा मरणान्वेषण सूचना के साथ बंद एक पूर्ववर्ती प्रकथन, उसे
करने वाले का प्रतिवादी करने या अभियोजन द्वारा उसकी व्याख्या करने के अतिरिक्त
अभियुक्तों के नाम प्रकट करने सहित किसी प्रयोजन हेतु अभियोजन द्वारा प्रयुक्त
नहीं किया जा सकता है।
मरणान्वेषण
सूचना के दौरान अभिलिखित प्रकथन- मरणान्वेषण के दौरान अन्वेषकों द्वारा लेखबद्ध
साक्षियों का कथन धारा 162 के अवरोध के भीतर होगा और यह केवल परावचन के लिये
प्रयुक्त हो सकता है लेकिन धारा 162 के तहत दी गयी मरणान्वेषण रिपोर्ट में
लेखबद्ध कथनों में कोई परावचन चिन्हांकित नहीं थे। यह अभिनिर्धारित हुआ था कि
साक्ष्य में उक्त कथन ग्राह्य नहीं थे। जहाँ प्रथम एफ.आई.आर. के मिथ्या पाये
जाने पर दूसरी एफ.आई.आर. दाखिल की गयी थी, और परिवादी तथा क्षत साक्षियों को शामिल
करते हुये सभी प्रत्यक्ष साक्षियों ने दूसरी एफ.आई.आर. के सविवरण को समर्थित किया
था वहां यह माना गया था कि यह धारा 162 द्वारा प्रभावित नहीं होगा।
अन्वेषण
के दौरान पुलिस को दिया गया साक्षी का कथन या अभिकथित रूप से पुलिस को दिया गया
प्रत्यक्ष साक्षी का लिखित कथन अन्य कागजों के साथ आरोप पत्र के अनुवर्तन के समय
पेश नहीं किया गया था। ऐसे मामले में यदि विलंब का संतोषप्रद स्पष्टीकरण होता है
तो विचारण के पश्चातवर्ती प्रकरण पर भी ऐसे दस्तावेजों को स्वीकार करने के
विरुद्ध कोई विधिक वर्जन नहीं है।
मरणान्वेषण
सूचना के दौरान अभिलिखत प्रकथन यथा वे पुलिस द्वारा अभिलिखित पूर्ववर्ती प्रकथन
होते हैं, धारा 162 के तहत आच्छादित होंगे अत: अंतर्विरोधी को प्रमाणित करने के प्रयोजन हेतु युक्त किये
जा सकते हैं।
मरणान्वेषण
सूचना में किये गये प्रकथन इस धारा द्वारा प्रभावित एवं साक्ष्य में अस्वीकार्य
होते हैं, यदि हस्ताक्षरी का साक्षियों के रूप में निरीक्षण नहीं किया गया। इस
निषेध की पुलिस अधिकारी द्वारा उपेक्षा नहीं की जा सकती है न ही स्वयं उस व्यक्ति
का प्रकथन अभिलिखित कर सकता है बल्कि इसे संबंधित व्यक्ति द्वारा पुलिस अधिकारी
को संबोधित संदेश के रूप में रख सकता है।
जहाँ
मरणान्वेषण सूचना में अभिलिखित मृत्यु का समय 10:30 बजे सुबह के स्थान पर 10:30
बजे रात वहाँ यह असंगती महत्वपूर्ण नहीं होती है। मरणान्वेषण सूचना में कथिन
उद्धरण उसका एक पुनर्प्रस्तुतीकरण मात्र होता है जिसके विषय में साक्षी ने अन्वेषण
अधिकारी को बताया होगा। यह धारा 162 के क्षेत्र तथा उसमें होने वाले प्रत्याख्यान
के अंतर्गत आता है, अतएव इसे इसके कर्ता का प्रतिवाद करने के अतिरिक्त किसी
प्रयोजन हेतु प्रयुक्त नहीं किया जा सकता है।
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