High Court Dictation Online Test Series || Part-14|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP
अभियुक्त नररू पर
भारतीय दण्ड प्रक्रिया की धारा 363 एवं 366 के तहत यह आरोप है कि उसने दिनांक
25.5.15 को 10.30 बजे फरियादी का मकान ग्राम गढ़ाकोटा हवेली से अभियोक्त्री उम्र
लगभग 18 वर्ष अप्राप्तवय को उसके विधिपूर्ण संरक्षक मैथलीशरण की विधि संरक्षकता
में उसे उसकी सम्मति के बिना, उससे शादी करने के लिए बहला-फुसला कर भाण्डेर, ग्वालियर,
ले जाकर, उसका व्यपहरण करते हुए उसका सम्मति के बिना, अयुक्त संभोग करने अथवा
शादी करने के लिए उसे विवश या विलुब्ध करने के आशय से या उसे शादी करने या अयुक्त
संभोग करने के लिए विवश या विलुब्ध किया जायेगा, यह संभाव्य जानते हुए, ले जाकर
व्यवहरण या अपहरण किया गया।
प्रकरण में कोई भी महत्वपूर्ण स्वीकृत तथ्य
नहीं है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा विभिन्न न्याय दृष्टांतों में दिये
गये दिशा-निर्देशों के प्रकाश में प्रकरण में अभियोक्त्री के नाम का उल्लेख नहीं
किया जा रहा है।
संक्षेप में अभियोजन कहानी इस प्रकार है कि
फरियादी मैथिलीशरण ने दिनांक 28.5.15 को पुलिस थाना टीकमगढ़ में इस आशय की प्रथम
सूचना रिपोर्ट लेख करायी कि वह ग्राम गढ़ाकोटा हवेली में रहता है अभियोक्त्री उसकी
बेटी है जो करीब 18 वर्ष की है अभियोक्त्री शनिवार के रोज बावरी की कहकर अकेली
गयी थी तब से वापस नही लौटी है, आस-पास रिश्तेदारी में सब जगह ढूंढ लिया है लेकिन
अभियोक्त्री नहीं मिली है अभियोक्त्री को गांव के नररू लड़के के साथ भोपाल में
देखा गया है, अभियोक्त्री को नररू जाटव हमारे गांव से बहला फुसलाकर शादी करने का
प्रलोभन देकर भगा ले गया है, नररू जाटव का भी उसी दिन से घर से लापता होकर कही
गायब है।
फरियादी मैथलीशरण द्वारा उक्त प्रथम सूचना
रिपोर्ट लेख कराये जाने पर प्रकरण अनुसंधान में लिया गया, अनुसंधान के दौरान
घटनास्थल का नक्शामौका बनाया गया, अभियोक्त्री की अंकसूची जब्त कर जब्ती
पंचनामा तैयार किया गया, साक्षीगण के कथन धारा 161 दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत
लेख किये गये, अभियुक्त नररू को गिरफ्तार कर पंचनामा बनाया गया। प्रकरण का समस्त
अनुसंधान पूर्ण होने पर अभियोग पत्र न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी टीकमगढ़ के
न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी जिला
टीकमगढ़ द्वारा यह प्रकरण इस न्यायालय को विधिवत विचारण हेतु उपार्पित किया गया।
मेरे विद्वान पूर्वाधिकारी महोदय, द्वारा
अभियुक्त पर निर्णय की कण्डिका 1 में वर्णित उपरोक्तानुसार आरोप आरोपित किये
गये। आरोप अभियुक्त को पढ़कर सुनाए व समझाये जाने, पर उसने अपराध करना अस्वीकार
कर, विचारण किये जाने की प्रार्थना की।
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