High Court Dictation Online Test Series || Part-15|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)
दण्ड
प्रक्रिया संहिता की धारा 197 के प्रावधान अनुसार किसी भी व्यक्ति पर जो कि
लोकसेवक है और जिसे सरकार या उसकी मंजूरी से ही उसके पद से हटाया जा सकता है, किसी
ऐसे अपराध का अभियोग है, जिसके बारे में यह अभिकथित है कि वह उसके द्वारा तब किसी
गया था, जब वह उसके पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कार्य कर रहा था या जब उसका ऐसे
कार्य करना तात्पर्यित था, जब कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान राज्य
सरकार की पूर्व मंजूरी से ही करेगा, अन्यथा नहीं।
यद्यपि
विभिन्न न्याय दृष्टांतों में प्रतिपादित मतानुसार यह भी स्पष्ट है कि ऐसी
मंजूरी तब आवश्यक नहीं है, जब अभियोजित कार्य ऑफिशियल ड्यूटी की कैपीसिटी में
नहीं किया गया हो। किंतु विचारण न्यायालय के परिवाद प्रकरण के अवलोकन पर यह प्रकट
है कि विचारण न्यायालय द्वारा उक्त परिवाद प्रकरण के संबंध में पुलिस थाना शाजापुर
से बुलाये गये जांच प्रतिवेदन में यह प्रतिवेदित किया गया है कि घटना दिनांक को ही
परिवादी सुशीलाबाई, उसके पुत्र मनोज एवं अन्य तीन व्यक्तियों द्वारा गैर-परिवादीगण
के साथ गाली-गलौज की गयी और गैर-परिवादीगण थाना शाजापुर के अपराध क्रमांक 445/15
अपराध धारा 302, 34 भारतीय दण्ड संहिता की विवेचना के दौरान आरोपी विजय एवं लक्ष्मी
के संबंध में नंदीश्वर कॉलोनी शाजापुर गये थे। जहां परिवादी के पुत्र मनोज से
पूछताछ के दौरान, जो कि थाना शाजापुर के उक्त अपराध का अभियुक्त भी था, ने हमराह
आरक्षक भज्जू चौबे के साथ झूमा-झटकी की और गुत्थमगुत्था होने पर हाकम परिवारी
सुशीला व हेमराज राजपूत द्वारा उक्त आरक्षक को पकड़ लिया गया और मनोज को छुड़ा
लिया गया जिससे वह भाग गया और इस संबंध में परिवादी सुशीला एवं उसके पुत्र मनोज
एवं हाकम एवं हेमराज के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट भी अपराध क्रमांक 317/12 पर
दर्ज की गयी है। उक्त प्रतिवेदन से यह स्पष्ट है कि परिवादी एवं उसके पुत्र के
द्वारा थाना शाजापुर के उक्त अपराध के विवेचना के शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न
की गयी थी।
यद्यपि
मैं इस बिल का समर्थन करता हूँ लेकिन मंत्री महोदय से यह कहना चाहता हूँ कि इस पर
जनता की राय ली जाये। इसके साथ ही ऐसा बिल भी लाया जाये जिसमें यह विवरण हो की ट्रैक्टर
महंगा होगा या सस्ता होगा, कितने हॉर्स पॉवर का उसमें इंजन होगा? इस बिल में यह
भी प्रावधान होना चाहिए कि राष्ट्रीकरण के बाद जो भ्रष्टाचार या लापरवाही बढ़
गयी है उसको कैसे मिटाया जायेगा। तभी हम समझेंगे कि वास्तव में इस देश में कृषि
क्रांति आने वाली है।
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