High Court Dictation Online Test Series || Part-18|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)
इस आवेदन द्वारा आवेदक की ओर से प्रस्तुत आवेदन
पत्र अंतर्गत धारा 5 परिसीमा अधिनियम वास्ते विलंब माफी का निराकरण होगा। आवेदन
के तथ्य यह हैं कि प्रार्थी कृषक होकर अल्प शिक्षित वर्ग से संबंधित है।
प्रार्थी को अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित अवार्ड की जानकारी होने पर अपने
अधिवक्ता से संपर्क किया। अधिवक्ता द्वारा बताया गया कि आदेश की अपील करनी होगी,
इस हेतु 6 माह का समय अपील हेतु प्राप्त है। अपने अधिवक्ता द्वारा दी गयी
जानकारी के कारण तीन माह की समयावधि में रिफरेंस प्रस्तुत नहीं कर सका। विगत
दिनांक 22 मई 2016 को प्रार्थी ने कुमारी अंजली गुप्ता अभिभाषक से संपर्क किया। उनके
द्वारा बताया गया कि रिफरेंस प्रस्तुत करने हेतु तीन माह की समयावधि है। प्रार्थी
को रिफरेंस प्रस्तुत करने में हुआ तीन माह का विलंब पूर्व के अभिभाषक द्वारा दी
गयी मिथ्या जानकारी के आधार पर होने से न्यायहित में क्षमा किये जाने योग्य है।
आवेदन स्वीकार कर रिफरेंस प्रस्तुत करने में हुआ विलंब सदभाविक एवं पूर्व
अभिभाषक द्वारा दी गयी गलत जानकारी पर आधारित होने से न्यायहित में क्षमा कर
रिफरेंस को सुनवाई बाबत ग्रहण करने की प्रार्थना की है। अनावेदकगण की ओर से जवाब
पेश कर आवेदन के तथ्यों को अस्वीकार किया गया है तथा यह व्यक्त किया गया है,
कि प्रार्थी अल्प शिक्षित वर्ग से संबंधित है। इसका प्रमाण पेश नहीं किया गया है।
आवेदक द्वारा किस अभिवक्ता से परामर्श लिया व उन्होंने 6 माह का समय रिफरेंस पेश
करने के लिये बताया। उक्त अभिवक्ता का नाम पता एवं कार्य स्थान का विवरण नहीं
दिया गया है। कुमारी अंजली गुप्ता अभिभाषक द्वारा रिफरेंस पेश करने हेतु तीन माह
का समय बताया गया है, जो कि गलत है। रिफरेंस पेश करने हेतु अवार्ड दिनांक से 42
दिन की समयावधि दी गयी है। तीन माह का विलंब किस अभिभाषक द्वारा दी गयी जानकारी के
आधार पर हुआ है। उक्त अधिवक्ता का नाम पता, कार्य करने का स्थान का विवरण नहीं
दिया गया है। न ही जिस अभिभाषक ने गलत जानकारी दी है, उनका शपथ पत्र प्रस्तुत
किया गया है। प्रस्तुत रिफरेंस जो विलंब से पेश की गई है। जिन रिफरेंसों में धारा 5 परिसीमा का आवेदन प्रस्तुत हो, उन
रिफरेंसों को सुनने को श्रवणाधिकार इस न्यायालय को प्राप्त नहीं है। आवेदन निरस्ती
योग्य है। विलंब से प्रस्तुत रिफरेंस जिसमें धारा 5 का आवेदन प्रस्तुत हो, की
सुनवाई माननीय उच्च न्यायालय में की जाती है, इस संबंध में न्याय दृष्टांत है।
आवेदन निरस्त करने की प्रार्थना की है।
Comments
Post a Comment