High Court Dictation Online Test Series || Part-19|| BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP)


सभापति महोदय, पिछले साल इस सदन में यह सुझाव रखा गया था कि हमारे किसान जो फसल पैदा करते हैं उसका बीमा करने की व्‍यवस्‍था की जानी चाहिए। इस सुझाव पर विचार करने के लिये कुछ सदस्‍यों ने एक योजना भी बनायी थी लेकिन फसल बीमा योजना पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इस योजना को अभी तक लागू नहीं किया गया है। योजना आयोग ने यह आश्‍वासन दिया था कि वह इसके लिये आवश्‍यक धन की व्‍यवस्‍था करेगा। हो सकता है कि इस संबंध में राज्‍य सरकारों में एक मत न रहा हो। उनकी यह धारणा हो सकती है कि इस योजना के लागू होने से किसानों पर बोझा पडेगा। यद्यपि अभी भी राज्‍य सरकारों के इस दृष्टिकोण में कोई विशेष परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है फिर भी इतना अवश्‍य है कि अब वे फसल बीमा की योजना को लागू करने के लिये तैयार हैं। इसके लिये वे चाहते हैं कि इस योजना पर आने वाले खर्च केंद्र सरकार वहन करे।
     यह वाद ग्राम केशवगढ तहसील व जिला डिंडौरी स्थित सर्वे क्रमांक 12/2 रकवा 150 हेक्‍टेयर के स्‍वत्‍व घोषणा एवं स्‍थायी निषेधाज्ञा प्राप्‍त के अनुतोषों के लिये प्रस्‍तुत किया गया है। वादी का वाद संक्षेप में इस प्रकार है कि वादी एवं प्रतिवादी एक ही कुटुम्‍ब के हैं। रामप्रसाद पटेल, काशीराम पटेल एवं गंगाराम पटेल तीनों आपस में सगे भाई थे जिनका स्‍वर्गवास हो चुका है। गंगाराम पटेल की कोई संतान नहीं थी अत: उनके स्‍वत्‍व की भूमि रामप्रसाद पटेल एवं काशीराम पटेल में समाहित की इस प्रकार वादग्रस्‍त भूमि अन्‍य भूमि के साथ साथ रामप्रसाद पटेल एवं काशीराम पटेल की भूमि थी। संपूर्ण भूमि का बंटवारा होने पर वादग्रस्‍त भूमि वादीगण के पिता जगन्‍नाथ के स्‍वामित्‍व एवं आधिपत्‍य में आई। जिनका स्‍वर्गवास होने पर वादग्रस्‍त भूमि वादीगण के स्‍वामित्‍व एवं आधिपत्‍य में आईं जिस पर वादीगण का कब्‍जा बना हुआ है। करीब 4 वर्ष पूर्व प्रतिवादी द्वारा वादग्रस्‍त भूमि के संबंध में वादीगण के स्‍वत्‍व पर विवाद किया तब वादीगण द्वारा राजस्‍व अभिलेखों के देखने पर वादग्रस्‍त भूमि पर प्रतिवादीगण का नाम पाया है। प्रतिवादी मात्र नामधारी कृषक है। प्रतिवादी ने राजस्‍व अभिलेखों में अपने नाम का लाभ उठाकर दुर्भावनापूर्वक बिना की बंटवारे के अधिकारविहीन शून्‍य विक्रय पत्र दिनांक 16 अप्रैल 2016 को प्रतिवादी के पक्ष में सम्‍पादित करवाया। जबकि राजस्‍व अभिलेखों में वादग्रस्‍त भूमि अन्‍य नंबरों के साथ श्‍यामलाल भूमि खाते में अंकित है वादीगण द्वारा विक्रय पक्ष के संबंध में राजस्‍व न्‍यायालय में नामांतरण आपत्ति प्रस्‍तुत की है।

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