𝐌𝐏 𝐇𝐢𝐠𝐡 𝐂𝐨𝐮𝐫𝐭 𝐇𝐢𝐧𝐝𝐢 𝐃𝐢𝐜𝐭𝐚𝐭𝐢𝐨𝐧 𝟒𝟎𝐖𝐏𝐌 𝐒.𝐍.𝟏𝟳|| #HindiDictation #mphc #40WPM
पूर्व भारत में आजीवन निर्वासन का दंडादेश कारागार में किसी बंदी द्वारा आजीवन कठोर कारावास के रूप में भोगा जाता था। जब तक कि उक्त दंडादेश किसी समुचित प्राधिकारी द्वारा दंड संहिता या दंड प्रक्रिया संहिता के सुसंगत उपबंधों के अधीन कम न कर दिया जाए या उसका परिहार न कर दिया जाए तब तक आजीवन कारावास से दंडादिष्ट बंदी विधि के अधीन कारागार में आजीवन अवधि का दंड भोगने के लिए ही बाध्य होगा। कारागार अधिनियम के अधीन विरचित नियमों के अंतर्गत ऐसे बंदी को सामान्य, विशेष और राजकीय परिहार प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाया गया है और उक्त परिहार से उसके कारावास की अवधि को कम किया जाएगा। परिहार की गणना के प्रयोजन के लिए आजीवन निर्वासन के दंडादेश की अवधि निश्चित मानी गई है किंतु ऐसा केवल इसी विशेष प्रयोजन के लिए किया जा सकता है न कि अन्य किसी और उद्देश्य के लिए। चूंकि आजीवन निर्वासन, आजीवन कारावास के समतुल्य है, इसलिए इसे अनिश्चित अवधि के लिए ही माना जाएगा, इस प्रकार प्राप्त किया गया परिहार व्यवहारिक रूप से दोषसिद्ध व्यक्ति के लिए सहायक नहीं हो सकता क्योंकि उसकी मृत्यु के समय क...

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